
Sri Parvathi Shakthi Tandav Stuti श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
कुचेल-केश-पाश-बद्ध-मल्लिका-सुगन्धिनी,
उमेश-वाम-भाग-नित्य-केलि-कंज-धारिणी।
अशोक-पुष्प-पल्लवैः सु-रञ्जित-स्व-मूर्धनी,
करोतु शक्ति-ताण्डवं सदा शिवा भवानी ॥1॥
ललाट-बिन्दु-सिन्धु-रक्त रञ्जिता स्व-भालका,
धनुर्धरा त्रिशूलिनी कपाल-पाश-धारिणी।
कराल-काल-मर्दिनी समस्त-दुःख-हारिणी,
नमामि शैल-पुत्रिणीं सदा शिवा भवानी ॥2॥
रणत्-क्वणत्-कणत्-किङ्किणी-नूपुर-घोष-मण्डिता,
चलत्-चलत्-पद-क्रमैः सु-विश्व-चक्र-चालिनी।
अघोर-रूप-धारिणी घोर-शत्रु-घातिनी,
प्रचण्ड-शक्ति-रूपिणी सदा शिवा भवानी ॥3॥
जगज्जननी पावनी प्रसन्न मन्द-हासिनी,
सु-भक्त-वृन्द-वन्दिता समस्त-विघ्न-नाशिनी।
प्रलय-वह्नि-रञ्जिता महानिभय-दायिनी,
जयतु जयतु पार्वती सदा शिवा भवानी ॥4॥
जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्पनिर्झरी,
विलोम-शक्ति-रूपिणी कराल-खड्ङ्ग-धारिणी।
धगद् धगद् धगज्-ज्वलत्-ललाट-पट्ट-पावके,
किशोर-चन्द्र-शेखरे रतिं प्रतिक्षणं मम ॥5॥
महा-विचित्र-नृत्त-नाद-डम्ब-डम्ब डम्बिका,
प्रचण्ड-मुण्ड-मण्डली-गले-विराज-मालिका।
दश-दिगन्त-गामिनी सु-तेज-पुञ्ज-भासिनी,
पुनातु माँ सदा-सदा उमा-महेश्वरी विभू ॥6॥
नितम्ब-चन्द्र-कान्ति-कान्त मेखला-सु-शोभिनी,
कराल-दंष्ट्र-भास्वरा सु-जिह्व-रक्त-रञ्जिता।
महिष-दैत्य-मर्दिनी सुरेन्द्र-दुःख-भञ्जिनी,
जयतु शैल-नन्दिनी शिवा-शवा-विहारिणी ॥7॥
नवाक्षर-मन्त्र-मयी त्रिनेत्र-तेज-दायिनी,
कुलाकुल-स्वरूपिणी महा-विपत्ति-हारिणी।
समस्त-सिद्ध-योगिनी गणेश्वर-प्रमोदिनी,
भजामि दिव्य-पार्वतीं शिव-प्रिया-मनोहराम् ॥৪॥
प्रफुल्ल-नील-पङ्कज-प्रपञ्च-कालिम-प्रभा-
वलम्बि-कण्ठ-कन्दली-रुचि प्रबद्ध कन्धरम्।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजाम्विका-वृषध्वजं नमामि शम्भु-सुन्दरीम् ॥9॥
क्वचिद्-दिगम्बरी-छटा-विचित्र-रूप-धारिणी,
क्वचिद्-मृणाल-कोमला सु-पुष्प-हार-धारिणी।
क्वचिद्-महा-भयङ्करा कराल-काल-रूपिणी,
नमामि तां जगन्मयीं शिवा-सखीं सु-पावनीम् ॥10॥
रणत् मृदङ्ग शङ्ख नाद घोर श ब्द मण्डिता,
चलत् कपाल कुण्डला फणा मणि विभूषिता।
धनु र्विमुक्त सायकैः सुरारि सैन्य दारिणी,
प्रचण्ड चण्ड नन्दिनीं नमामि दैत्य हारिणीम् ॥11॥
नृमुण्ड माल मण्डिता विशीर्ण केस पाशिका,
कराल लोल जिह्विका त्रिलोक त्रास नाशिनी।
महा कपाल पात्र गा सु रक्त पान कारिणी,
जयत्य मेघ सुन्दरी महा धमाधम ध्वनिः ।॥12॥
समस्त शक्ति चक्र गा सु बिन्दु मध्य वासिनी,
षडब्ज भेदिनी मुदा महा सुषुम्न वाहिनी।
महा प्रकाश पुञ्जिका शिव स्वरुप कारिणी,
मनस्विनि नमोऽस्तुते प्रपन्न भक्त तारिणी ॥13॥
अखण्ड शक्ति मण्डले सदैव काल कालिनी,
विचित्र सृष्टि कारिणी सदा सु मङ्गल प्रदा।
इदं हि नित्य मेव मुक्त मुत्तमोत्तमं स्तवं,
पठन् स्मरन् ब्रुवन् नरो विशुद्धिमेति संततम् ॥14॥
नमस्ते नमस्ते महा शक्ति रूपे, नमस्ते नमस्ते शिवे शान्त रूपे। नमस्ते नमस्ते जगद् व्याप्त देहे, नमस्ते नमस्ते नमस्ते नमस्ते ॥15॥
Flere episoder fra "Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers"



Gå ikke glip af nogen episoder af “Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers” - abonnér på podcasten med gratisapp GetPodcast.








