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ज्ञानकर्मसंन्यासयोग
इस अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने Geeta का पौराणिक इतिहास बताया है। सबसे पहले उन्होंने गीता का ज्ञान सूर्य भगवान (विवासवन) को दिया था।
उसके बाद उन्होंने अपने शिष्यों को दिया। और यह आगे चलता गया।
भगवान कहते हैं कि जब -जब धर्म का नाश होता है वे अवतार लेते हैं। पापियों को दण्डित करते हैं। लेकिन जो उन्हें सम्पर्पित हो जाता है उसकी रक्षा करते हैं।
यह युद्ध उनके द्वारा ही रचा गया है। ताकि पापियों को दण्डित किया जा सके।
कृपया गीता के अध्ययन को बार बार सुने. प्रस्तुत है अध्याय - 04 धन्यवाद
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