Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers podcast

Shiv Swarnamala Stuti शिव स्वर्णमाला स्तुति

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अथ कथमपि मद्रसनां त्वद्गुणलेशैर्विशोधयामि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १ ॥ आखण्डलमदखण्डनपण्डित तण्डुप्रिय चण्डीश विभो ।। साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २ ॥ इभचर्माम्बर शम्बररिपुवपुरपहरणोज्ज्वलनयन विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३ ॥ ईश गिरीश नरेश परेश महेश बिलेशयभूषण विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ४ ॥ उमया दिव्यसुमंगलविग्रहयालिंगितवामांग विभॊ । साम्ब सदाशिव शंभॊ शंकर शरणं मॆ तव चरणयुगम् ॥ ५ ॥ ऊरीकुरुमामज्ञमनाथं दूरीकुरु मे दुरितं भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ६ ॥ ऋषिवरमानसहंस चराचरजननस्थितिलयकारण । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ७ ॥ ॠक्षाधीशकिरीट महोक्षारूढ विधृतरुद्राक्ष विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ८ ।।ऌवर्णद्वन्द्वमवृन्तसुकुसुममिवाङ्घ्रौ तवार्पयामि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ९ ॥ एकं सदिति श्रुत्या त्वमेव सदासीत्युपास्महे मृड भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १० ॥ ऐक्यं स्वभक्तेभ्यो वितरसि विश्वंभरोऽत्र साक्षी भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ११ ॥ मिति तव निर्देष्ट्री मायास्माकं मृडोपकर्त्री भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १२ ॥ औदास्यं स्फुटयति विषयेषु दिगम्बरता च तवैव विभो साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १३ ॥ अंतः करणविशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम्!! १४ ॥ अस्तोपाधिसमस्तव्यस्तैर्‌रूपैर्जगन्मयोऽसि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १५ ॥ करुणावरुणालय मयि दास उदासस्तवोचितॊ न हि भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १६ ॥ खलसहवासं विघटय घटय सतामेव संगमनिशम् । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १७ ॥ गरलं जगदुपकृतये गिलितं भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १८ ॥ घनसारगौरगात्र प्रचुरजटाजूटबद्धगंग विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ १९ ॥ ज्ञप्तिः सर्वशरीरेष्वखण्डिता या विभाति सा त्वं भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २० ॥ चपलं मम हृदयकपिं विषयद्रुचरं दृढं बधान विभो । साम्ब सदाशिव शंभॊ शंकर शरणं मॆ तव चरणयुगम् ॥ २१ ॥ छाया स्थाणोरपि तव तापं नमतां हरत्यहो शिव भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २२ ॥ जय कैलासनिवास प्रमथगणाधीश भूसुरार्चित भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २३ ॥ झणुतकझङ्किणुझणुतत्‌किटतकशब्दैर्नटसि महानट भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २४ ॥ ज्ञानं विक्षेपावृतिरहितं कुरु मे गुरुस्त्वमेव विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २५ ॥ टङ्कारस्तव धनुषो दलयति हृदयं द्विषामशनिरिव भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २६ ॥ ठाकृतिरिव तव माया बहिरन्तः शून्यरूपिणी खलु भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २७ ॥ डम्बरमंबुरुहामपि दलयत्यनघं त्वदङ्घ्रियुगलं भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २८ ॥ ढक्काक्षसूत्रशूलद्रुहिणकरोटीसमुल्लसत्कर भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ २९ ॥ णाकारगर्भिणी चेच्छुभदा ते शरगतिर्नृणामिह भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३०॥ तव मन्वतिसंजपतः सद्यस्तरति नरो हि भवाब्धिं भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३१॥ थूत्कारस्तस्य मुखे भूयात्ते नाम नास्ति यस्य विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३२॥ दयनीयश्च दयालुः कोऽस्ति मदन्यस्त्वदन्य इह वद भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३३॥ धर्मस्थापनदक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्षयज्ञशिक्षक भो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३४॥ ननु ताडितोऽसि धनुषा लुब्धक धिया त्वं पुरा नरेण विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३५॥ परिमातुं तव मूर्तिं नालमजस्तत्परात्परोऽसि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३६॥ फलमिह नृतया जनुषस्त्वत्पदसेवा सनातनेश विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३७॥ बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुणरुचितां चिरं प्रदेहि विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥३८॥ भगवन्‌ भर्ग भयापह भूतपते भूतिभूषिताङ्ग विभो । साम्ब सदाशिव शंभो शंकर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ ३९।। महिमा तव नहि माति श्रुतिषु हिमानीधरात्मजाधव भो। सांब सदाशिव शंभो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम ॥४०॥ यमनियमादिभिरङ्गैर्यमिनो हृदये भजन्ति स त्वं भो। सांब सदाशिव शंभो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥४१॥

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