Rajat Jain 🚩 #Chanting and #Recitation of #Jain & #Hindu #Mantras and #Prayers podcast

Guru Gorakhnath Chalisa गुरु गोरखनाथ चालीसा

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Guru Gorakhnath chalisa गुरु गोरखनाथ चालीसा • दोहा गणपति गिरजा पुत्र को सुमिरु बारम्बार | हाथ जोड़ बिनती करू शारद नाम आधार || चोपाई जय जय जय गोरख अविनाशी | कृपा करो गुरुदेव प्रकाशी || जय जय जय गोरख गुण ज्ञानी | इच्छा रूप योगी वरदानी || अलख निरंजन तुम्हरो नामा | सदा करो भक्त्तन हित कामा || नाम तुम्हारो जो कोई गावे | जन्म जन्म के दुःख मिट जावे || जो कोई गोरख नाम सुनावे | भूत पिसाच निकट नहीं आवे|| ज्ञान तुम्हारा योग से पावे | रूप तुम्हारा लख्या न जावे || निराकार तुम हो निर्वाणी | महिमा तुम्हारी वेद न जानी || घट - घट  के  तुम  अंतर्यामी  | सिद्ध   चोरासी  करे  परनामी  || भस्म  अंग  गल  नांद  विराजे | जटा  शीश  अति  सुन्दर  साजे  || तुम  बिन  देव  और  नहीं  दूजा  | देव  मुनिजन  करते  पूजा  || चिदानंद  संतन   हितकारी  | मंगल  करण  अमंगल  हारी  || पूरण  ब्रह्मा सकल  घट  वासी  | गोरख  नाथ  सकल  प्रकाशी || गोरख  गोरख  जो  कोई  धियावे  | ब्रह्म   रूप  के  दर्शन  पावे || शंकर  रूप  धर  डमरू  बाजे  | कानन  कुंडल  सुन्दर  साजे  || नित्यानंद  है  नाम  तुम्हारा  | असुर  मार  भक्तन  रखवारा  || अति  विशाल  है  रूप  तुम्हारा  | सुर  नर  मुनि  जन  पावे  न  पारा  || दीनबंधु  दीनन  हितकारी  | हरो  पाप  हम  शरण  तुम्हारी || योग  युक्ति  में  हो  प्रकाशा | सदा  करो  संतान  तन  बासा || प्रात : काल ले नाम तुम्हारा | सिद्धि बढे अरु योग प्रचारा || हठ हठ हठ गोरछ हठीले | मर मर वैरी के कीले || चल चल चल गोरख विकराला | दुश्मन मार करो बेहाला || जय जय जय गोरख अविनाशी | अपने जन की हरो चोरासी || अचल अगम है गोरख योगी | सिद्धि दियो हरो रस भोगी || काटो मार्ग यम को तुम आई | तुम बिन मेरा कोन सहाई || अजर अमर है तुम्हारी देहा | सनकादिक सब जोरहि नेहा || कोटिन रवि सम तेज तुम्हारा | है प्रसिद्ध जगत उजियारा || योगी लखे तुम्हारी माया | पार ब्रह्म से ध्यान लगाया || ध्यान तुम्हारा जो कोई लावे | अष्ट सिद्धि नव निधि पा जावे || शिव गोरख है नाम तुम्हारा | पापी दुष्ट अधम को तारा || अगम अगोचर निर्भय नाथा | सदा रहो संतन के साथा || शंकर रूप अवतार तुम्हारा | गोपीचंद, भरथरी को तारा || सुन लीजो प्रभु अरज हमारी | कृपासिन्धु योगी ब्रहमचारी || पूर्ण आस दास की कीजे | सेवक जान ज्ञान को दीजे || पतित पवन अधम अधारा | तिनके हेतु तुम लेत अवतारा || अखल निरंजन नाम तुम्हारा | अगम पंथ जिन योग प्रचारा || जय जय जय गोरख भगवाना | सदा करो भक्त्तन कल्याना || जय जय जय गोरख अविनाशी | सेवा करे सिद्ध चोरासी || जो यह पढ़े गोरख चालीसा | होए सिद्ध साक्षी जगदीशा || हाथ जोड़कर ध्यान लगावे | और श्रद्धा से भेंट चढ़ावे || बारह पाठ पढ़े नित जोई | मनोकामना पूर्ण होई || •

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